मैं गवाही देता हूँ कि आप इमामुल मुत्तक़ीन (परहेज़गारों के इमाम) हैं, और आपका वादा सच है, और आपकी बात सच है, और आप अल्लाह की राह में सब्र (धैर्य) करने वालों में से हैं।
ज़ियारत ए नहिया एक पवित्र और भावनात्मक यात्रा है जो शियाओं द्वारा की जाती है, खास तौर पर इमाम हुसैन (अस) के प्रेमियों द्वारा। यह यात्रा कर्बला, इराक में स्थित इमाम हुसैन (अस) के मज़ार पर जाने के लिए की जाती है। इस लेख में, हम ज़ियारत ए नहिया के महत्व, इसके इतिहास, और इस पवित्र यात्रा के दौरान पढ़े जाने वाले ज़ियारतनामे के बारे में चर्चा करेंगे। ziyarat e nahiya in hindi
इसमें इमाम हुसैन (अ) की शहादत के आखिरी लम्हों का बहुत दर्दनाक ज़िक्र है। (It mentions the painful final moments of Imam Hussain's martyrdom.) और आपका वादा सच है
कहा जाता है कि यह ज़ियारत उन आहटों की अभिव्यक्ति है, जब एक पोता अपने दादा की शहादत के स्थान पर खड़ा होकर उनकी पीड़ा और बलिदान को याद करता है। इसमें कर्बला की घटनाओं का वर्णन, यज़ीदी सेना के अत्याचारों का ज़िक्र और इमाम हुसैन के त्याग की महिमा समाहित है। और आपकी बात सच है
ज़ियारत-ए-नाहिया हमें याद दिलाती है कि कर्बला की जंग केवल एक ऐतिहासिक युद्ध नहीं था, बल्कि वह हक और बात़िल (सत्य और असत्य) के बीच का संघर्ष था। इमाम-ए-ज़माना के शब्द हमें सिखाते हैं कि इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनका गम हर दौर के इंसान के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
"इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन" - हम अल्लाह के हैं और उसी की तरफ लौटना है। सत्य पर बलिदान देने वाले इमाम हुसैन को कोटि-कोटि सलाम।